
बरही/विजयराघवगढ़। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुटेश्वर स्थित महानदी का क्षतिग्रस्त पुल पिछले करीब दो वर्षों से आवागमन के लिए बंद है। यह मार्ग खजुराहो-अमरकंटक को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। साथ ही मैहर स्थित विश्व प्रसिद्ध मां शारदा मंदिर सहित सतना-मैहर क्षेत्र की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए भी यह प्रमुख आवागमन मार्ग रहा है। पुल बंद होने से क्षेत्र के ग्रामीणों, यात्रियों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुल के रखरखाव और आवागमन बहाल करने की मांग को लेकर क्षेत्र की जनता कई बार आंदोलन कर चुकी है और प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक तथा प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपकर पुल की मरम्मत की मांग करती रही है। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक की ओर से भी कई बार जनता को भरोसा और आश्वासन दिए जाने की बात सामने आती रही कि क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए शासन से बजट स्वीकृत हो चुका है और टेंडर प्रक्रिया के बाद काम शुरू किया जाएगा।
लेकिन लंबे समय तक धरातल पर काम शुरू नहीं होने से जनता में निराशा बढ़ती गई। इसी बीच मंच से कुटेश्वर नदी के मौजूदा पुल के स्थान पर सिनगोड़ी के पिपरा घाट में नया पुल बनाए जाने की घोषणा और इससे संबंधित समाचार प्रकाशित होने के बाद क्षेत्रवासियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर मौजूदा पुल की मरम्मत कब होगी और तब तक आवागमन की समस्या का समाधान कैसे होगा।
अधिवक्ता ब्रह्ममूर्ति तिवारी ने जगाई उम्मीद
इसी निराशा के बीच कैमोर निवासी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता ब्रह्ममूर्ति तिवारी द्वारा अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किए जाने से मामले ने नया मोड़ लिया। याचिका में क्षतिग्रस्त पुल और उससे क्षेत्र की जनता को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया गया। बताया गया कि क्षेत्रीय पत्रकारों द्वारा लगातार प्रकाशित की गई खबरों और जनसमस्या से संबंधित समाचारों को भी याचिका में आधार बनाया गया।
याचिका के बाद शासन के जल संसाधन विभाग की ओर से पुल की मरम्मत के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पहली निविदा में किसी ठेकेदार द्वारा टेंडर नहीं डाले जाने की बात सामने आई। इसके बाद एसओआर रेट पर दोबारा निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, जिसे भी निरस्त कर दिया गया।
मामले में सरकार की ओर से समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। 8 अप्रैल 2026 के आदेश में न्यायालय ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि मौजूदा पुल की मरम्मत कर उसे आवागमन योग्य बनाया जा सकता है या नहीं। साथ ही यदि सरकार द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है तो उसकी जानकारी भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि जल संसाधन विभाग के इस पुल का निर्माण अब मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MP-RDC) के माध्यम से कराया जाएगा तथा मरम्मत के लिए निविदा जारी की गई है।
इसके बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने और आवश्यक मरम्मत कार्य कर सतना-मैहर मार्ग के कुटेश्वर पुल को यथाशीघ्र वाहनों के आवागमन योग्य बनाने के निर्देश दिया
पत्रकारिता की खबरें बनीं जनहित याचिका का आधार
अधिवक्ता ब्रह्ममूर्ति तिवारी का कहना है कि कुटेश्वर महानदी पुल की समस्या को लेकर बरही क्षेत्र के पत्रकारों ने लगातार समाचार पत्रों में जनता की परेशानी को प्रमुखता से उठाया। इन्हीं प्रकाशित खबरों और समाचार पत्रों की कटिंग को आधार बनाकर जनहित याचिका के माध्यम से इस गंभीर जनसमस्या को न्यायालय के समक्ष रखा गया।
पुल बंद होने से परेशान क्षेत्रवासियों के लिए हाईकोर्ट की कार्रवाई अब एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। लंबे समय से आश्वासन सुन रही जनता अब चाहती है कि आदेश के बाद महज कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुल की मरम्मत का काम वास्तव में धरातल पर दिखाई दे और जल्द से जल्द आवागमन बहाल हो।
जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात
अधिवक्ता ब्रह्ममूर्ति तिवारी ने चर्चा के दौरान कहा कि यदि अब भी पुल के मामले में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई नहीं होती है तो वे कोर्ट कंटेम्प्ट (अवमानना) की कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता की परेशानी और उसकी आवाज को लेकर आवश्यकता पड़ी तो वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
अब देखना यह है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कुटेश्वर महानदी पुल की मरम्मत को लेकर शासन और संबंधित विभाग कितनी तेजी से कदम उठाते हैं। दो वर्षों से बंद पुल को लेकर क्षेत्र की जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम और सुरक्षित आवागमन की बहाली चाहती है।








