
बरही/कटनी। कटनी जिले में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर प्रशासन के दावों की जमीनी हकीकत जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत तेमुआ में सामने आई है। यहां पहली से आठवीं तक की पढ़ाई करने वाले बच्चे जर्जर भवन के बीच शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं।
बारिश के दौरान स्कूल की छत से पानी टपक रहा है। छत की पपड़ियां गिर रही हैं और कई जगह सरिया तक दिखाई दे रही है। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
25 जून को जारी हुआ था आदेश
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिले में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर 25 जून को जिला प्रशासन द्वारा आदेश जारी किया गया था। जानकारी के अनुसार जिले के 175 स्कूलों के 393 जर्जर कमरों को गिराने और ध्वस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
आदेश के बाद उम्मीद थी कि जर्जर भवनों में पढ़ने वाले बच्चों को राहत मिलेगी, लेकिन तेमुआ का स्कूल प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर दिखा रहा है।
सात कमरों में एक जर्जर
तेमुआ स्कूल के प्राचार्य वीनेद्र गजभई के मुताबिक विद्यालय में कुल सात कमरे हैं, जिनमें एक कमरा जर्जर स्थिति में है। इसकी छत से बारिश में पानी टपकता है और पपड़ियां गिरती रहती हैं।
प्राचार्य का कहना है कि स्कूल की स्थिति से उच्च अधिकारियों को पत्राचार और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता
बारिश के मौसम में जर्जर भवन की स्थिति और गंभीर हो जाती है। टपकती छत और गिरती पपड़ियों के बीच बच्चों को बैठाकर पढ़ाना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
एक ओर सरकारी स्कूलों में बच्चों का प्रवेश बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई ग्रामीण स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित कमरों की कमी बनी हुई है।
हादसे से पहले कार्रवाई की जरूरत
तेमुआ के स्कूल की स्थिति अब केवल भवन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुकी है। जर्जर हिस्से का तकनीकी निरीक्षण कराकर उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन और आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक कक्ष की व्यवस्था करना जरूरी है। जिले में जर्जर स्कूल भवनों को हटाने के आदेश के बावजूद यदि तेमुआ जैसे स्कूलों में स्थिति जस की तस है, तो प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जरूरत कागजों पर कार्रवाई दिखाने की नहीं, बल्कि जमीन पर सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराने की है। क्योंकि किसी हादसे का इंतजार करने से बेहतर है कि प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाए।
बरही से नीरज तिवारी न्यूज़ वॉइस ऑफ इंडिया






