
कटनी/बरही। बरही स्थित शासकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. रत्नेश कुमार वर्मा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। वर्ष 2023 में उनके खिलाफ दर्ज छेड़छाड़ के मामले में न्यायालय से दोषमुक्त होने के बाद अब उन्होंने इस प्रकरण से जुड़े शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। डॉ. वर्मा की ओरसे11अधिकारियों-कर्मचारयों को भेजे गए कानूनी मानहानि नोटिस में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत छवि और वर्षों से अर्जित सम्मान को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इसी आधार पर नोटिस के माध्यम से कुल 15 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति और बिना शर्त लिखित माफीनामा मांगा गया है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस प्रकरण के बाद अब मानहानि का नोटिस भेजा गया है, उसमें न्यायिक सुनवाई पूरी होने के बाद 17 अक्टूबर 2025 को न्यायालय ने डॉ. रत्नेश कुमार वर्मा को दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कानूनी नोटिस भेजकर पूरे घटनाक्रम को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
13 मई 2023 को दर्ज हुआ था मामला
जानकारी के मुताबिक, 13 मई 2023 को डॉ. रत्नेश कुमार वर्मा के खिलाफ बरही थाने में छेड़छाड़ का प्रकरण दर्ज किया गया था। मामला न्यायालय पहुंचा और इसकी सुनवाई के बाद 17 अक्टूबर 2025 को उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। दोषमुक्ति के बाद अब डॉ. वर्मा की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत छवि तथा लंबे समय से अर्जित सम्मान को नुकसान पहुंचा। नोटिस में इसी कथित नुकसान को आधार बनाकर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।
15 दिन में जवाब और भुगतान की मांग
कानूनी नोटिस में संबंधित पक्षों को नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर लिखित रूप से बिना शर्त माफी मांगने तथा कुल 15 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा में मांगों का पालन नहीं किया जाता है तो डॉ. वर्मा की ओर से आगे न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने के साथ-साथ सक्षम न्यायालय में हर्जाने का दावा पेश करने की बात कही गई है।
इसके अतिरिक्त, नोटिस में कथित झूठी गवाही अथवा साक्ष्य से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
अधिकारियों की लंबी सूची डॉ. वर्मा की ओर से भेजे गए नोटिस की जद में प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं जिला प्रशासन से जुड़े कई अधिकारी-कर्मचारी बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार नोटिस मध्यप्रदेश शासन के शिक्षा विभाग के अपर सचिव वीरेंद्र सिंह भलावी, उच्च शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर के अतिरिक्त संचालक, कलेक्टर कटनी, पुलिस अधीक्षक कटनी, महिला थाना कटनी की भारसाधक अधिकारी मंजू शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को भेजा गया है।
नोटिस में डॉ. चित्रा प्रभात, ए.के. तिवारी, विभा श्रीवास्तव, वनश्री कुर्वर्ती, नयन सिंह सहित अन्य नाम भी शामिल बताए गए हैं। वहीं तत्कालीन बरही थाना प्रभारी को भी नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
दोषमुक्ति के बाद बदला घटनाक्रम
पूरे मामले में अब घटनाक्रम का रुख बदलता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023 में डॉ. वर्मा के खिलाफ दर्ज हुए प्रकरण के बाद जहां मामला न्यायालय में चला, वहीं न्यायालय से दोषमुक्ति के बाद अब डॉ. वर्मा ने स्वयं संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। 15 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के जवाब पर निगाहें टिकी हैं। यदि निर्धारित समय में नोटिस का जवाब नहीं दिया जाता अथवा दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान नहीं निकलता है तो मामला आगे न्यायालय तक पहुंच सकता है।
कौन सही और कौन गलत, अदालत में तय होगा
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मानहानि नोटिस में लगाए गए आरोप डॉ. वर्मा की ओर से किए गए दावे हैं। नोटिस प्राप्त करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों का पक्ष इस संबंध में सामने आना अभी बाकी है। इसलिए अंतिम रूप से किसी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी नोटिस का क्या जवाब देते हैं। क्या वे डॉ. वर्मा की मांग स्वीकार करते हैं, आरोपों का खंडन करते हैं या फिर कानूनी लड़ाई को न्यायालय तक ले जाते हैं।
अब आगे क्या?
एक ओर वर्ष 2023 के प्रकरण में न्यायालय से दोषमुक्ति मिल चुकी है, तो दूसरी ओर उसी प्रकरण को लेकर अब 15 करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस सामने आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन सकता है।
बहरहाल, अब असली परीक्षा संबंधित11अधिकारियों-कर्मचारियों की है—क्या 15 दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देकर विवाद खत्म किया जाएगा या फिर 15 करोड़ की मानहानि का यह मामला अदालत की चौखट तक पहुंचेगा? इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।








