
कटनी।अगर आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं और आपके साथ यात्रा कर रहे चूहे आपके सामान को नुकसान पहुंचा दें, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? कटनी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इस सवाल का बड़ा जवाब दिया है। आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रेलवे प्रशासन को सेवा में घोर लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित यात्री को 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। यह फैसला अब रेल यात्रियों के अधिकारों से जुड़े मामलों में एक मिसाल बनता नजर आ रहा है।
मामला कटनी शहर की आदर्श कॉलोनी निवासी विपिन दुबे से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 2020 में कटनी से कल्याण, मुंबई तक की यात्रा के लिए वातानुकूलित तृतीय श्रेणी यानी 3AC कोच में आरक्षण कराया था। यात्रा के दौरान उन्होंने अपना बैग निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखा था, लेकिन सफर के बीच जब उन्होंने सामान की जांच की तो पाया कि कोच में मौजूद चूहों ने उनके बैग को बुरी तरह कुतर दिया है। बैग में रखे कीमती कपड़े और अन्य जरूरी सामान भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।यात्री ने तत्काल रेलवे अधिकारियों को लिखित शिकायत दी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्याय की उम्मीद में उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। आयोग ने कहा कि यात्रियों से किराया वसूलने के बाद रेलवे का यह कानूनी दायित्व है कि वह उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमापूर्ण यात्रा उपलब्ध कराए। कोच में चूहों की मौजूदगी और यात्री के सामान को नुकसान पहुंचना सीधे तौर पर सेवा में कमी और लापरवाही का प्रमाण है।
आयोग ने माना कि इस घटना से यात्री को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा। इसी आधार पर रेलवे प्रशासन को कुल 15 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया।
मानसिक एवं शारीरिक क्षति – ₹5,000
वाद व्यय (न्यायालयीन खर्च) – ₹5,000
क्षतिग्रस्त सामान का मुआवजा – ₹5,000
कुल क्षतिपूर्ति – ₹15,000
इस चर्चित मामले में आवेदक विपिन दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौसुफ बिट्टू और अधिवक्ता प्रमोद तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने आयोग के समक्ष यह साबित किया कि प्रीमियम श्रेणी में यात्रा करने के बावजूद यात्री को मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा से वंचित रहना पड़ा।
कटनी उपभोक्ता आयोग का यह फैसला न केवल रेलवे प्रशासन की जवाबदेही तय करता है, बल्कि देशभर के रेल यात्रियों को यह संदेश भी देता है कि सेवा में लापरवाही के खिलाफ उपभोक्ता कानून के तहत न्याय प्राप्त किया जा सकता है। फिलहाल यह फैसला शहर के साथ-साथ कानूनी और उपभोक्ता अधिकारों के क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।






