“कटनी में गैस आधारित शवदाह गृह फिर शुरू, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम” 

कटनी, (13 अप्रैल) — नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर में पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक अंतिम संस्कार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कटनी नदी पार स्थित मुक्तिधाम परिसर में वर्षों से बंद पड़े गैस आधारित शवदाह गृह को पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। तकनीकी खामियों के कारण लंबे समय से बंद इस सुविधा को चालू करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
स्वास्थ्य अधिकारी संजय सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को गुजरात के वडोदरा से आई विशेषज्ञ टीम ने नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को गैस आधारित शवदाह प्रणाली के संचालन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान मशीन में लकड़ी डालकर सफलतापूर्वक डेमो भी किया गया, जिससे कर्मचारियों को इसकी कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण में मशीन के तकनीकी संचालन, सुरक्षा मानकों, उपकरणों के सही उपयोग तथा आपातकालीन परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी साथ ही, शवदाह प्रक्रिया को सुरक्षित, सुचारू और समयबद्ध तरीके से संचालित करने के उपाय भी बताए गए।

निरीक्षण के बाद निगमायुक्त के निर्देश पर हुई कार्रवाई

गौरतलब है कि 17 फरवरी को बस स्टैंड जोन कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने मुक्तिधाम परिसर का निरीक्षण किया था इस दौरान वर्ष 2017 में निर्मित गैस आधारित शवदाह गृह के बंद होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल इसे पुनः प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वयं ताला खुलवाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
आमजन के लिए सेवाएं हुईं शुरू

स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि सभी तैयारियां पूर्ण कर गैस आधारित शवदाह गृह की सेवाएं आमजन के लिए शुरू कर दी गई हैं। इस सुविधा के शुरू होने से अंतिम संस्कार प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक, तेज और व्यवस्थित होगी, साथ ही मुक्तिधाम परिसर में प्रदूषण में भी कमी आएगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सहायक यंत्री सुनील सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी संजय सोनी, क्षेत्रीय पार्षद उमेन्द्र अहिरवार, मुक्तिधाम समिति के संयोजक मनोहर मनोज, अध्यक्ष अजय सरावगी सहित नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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