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नई दिल्ली। देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना — मुंबई–अहमदाबाद उच्च गति रेल (एमएएचएसआर) — भविष्य के उच्च गति रेल नेटवर्क के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है। 508 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर जापान सरकार के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से पूर्णतः एलिवेटेड वायाडक्ट पर विकसित किया जा रहा है। 31 दिसंबर 2025 तक परियोजना पर ₹86,939 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं।
स्वदेशीकरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा
परियोजना के तहत लंबी स्पैन की स्टील ट्रस गर्डरों का निर्माण भारतीय कार्यशालाओं में हो रहा है। फुल-स्पैन लॉन्चिंग के लिए भारी मशीनरी का भी स्वदेशीकरण किया गया है। स्लैब ट्रैक सामग्री और विशेष ट्रैक मशीनें भारतीय निर्माताओं द्वारा विकसित की जा रही हैं।
भारतीय एजेंसियां, आईआईटी के सहयोग से डायनेमिक विश्लेषण और डिजाइन पर कार्य कर दीर्घकालिक विशेषज्ञता विकसित कर रही हैं।
तकनीकी नवाचार और सुरक्षा पहली बार 40 मीटर प्री-स्ट्रेस्ड बॉक्स गर्डर (लगभग 1000 मीट्रिक टन) की स्थापना फुल-स्पैन लॉन्चिंग तकनीक से, 16 घंटे में संभव एलिवेटेड कॉरिडोर पर स्वदेशी ध्वनि अवरोधक लगाए जा रहे हैं। ओएचई-पैंटोग्राफ इंटरैक्शन और ट्रैक्शन विद्युत आपूर्ति हेतु उन्नत सिमुलेशन मॉडल विकसित 90 मीटर ऊंची संभावित इमारत प्रावधान के साथ भूमिगत स्टेशन निर्माण। भूकंप सुरक्षा हेतु डैम्पर स्टॉपर और अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित।
प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास
करीब 1000 भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को जापानी पद्धति में प्रशिक्षित किया गया है। सूरत में विशेष ट्रैक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित है, जहां नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं।
स्टेशन विकास और आधुनिक सुविधाएं
12 प्रस्तावित स्टेशन — मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती — स्थानीय पहचान के अनुरूप डिजाइन किए जा रहे हैं।स्टेशनों पर नियंत्रित प्रवेश, सामान स्कैनर, मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी, पार्किंग और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी की सुविधा होगी। हरित भवन परिषद के प्लैटिनम मानकों के अनुरूप ऊर्जा दक्ष विशेषताएं शामिल की गई हैं।
निर्माण प्रगति 1389.5 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण पूर्ण 1651 उपयोगिताओं का स्थानांतरण गुजरात खंड में 352 किमी नींव एवं पियर कार्य पूर्ण 17 नदी पुल तैयार; नर्मदा, माही, ताप्ती, साबरमती पर कार्य उन्नत 21 किमी लंबी समुद्र के नीचे सुरंग निर्माण प्रारंभ, 4.8 किमी पूर्ण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत 280 किमी प्रति घंटा डिजाइन गति वाली ट्रेनसेट का निर्माण प्रगति पर है, जिसमें इंटीग्रल कोच फैक्टरी और बीईएमएल का सहयोग है।
समर्पित माल गलियारे से बढ़ी क्षमता रेल मंत्रालय ने पूर्वी (लुधियाना–सोननगर, 1337 किमी) और पश्चिमी (जेएनपीटी–दादरी, 1506 किमी) समर्पित माल गलियारे विकसित किए हैं। पूर्वी गलियारा पूर्णतः चालू है, जबकि पश्चिमी के 1404 किमी पर परिचालन शुरू हो चुका है। दोनों पर औसतन 406 ट्रेनें प्रतिदिन संचालित हो रही हैं।
यह जानकारी रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में दी।
परियोजना को देश के परिवहन इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है, जो न केवल यात्रा समय घटाएगी बल्कि क्षेत्रीय विकास और आर्थिक प्रगति को भी नई गति देगी।





