“17.36 लाख की पेंशन धोखाधड़ी: अपराध स्वीकारने के बाद भी आरोपी लिपिक पर कार्रवाई शून्य, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल “सेवानिवृत्त एएनएम 9 साल से भटक रही, फर्जी खाते से 144 बार निकाले गए पैसे, शिकायत वापस लेने का दबाव” 

न्यूज़ वॉइस ऑफ इंडिया

कटनी जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसमें सेवानिवृत्त एएनएम सावित्री वर्मा के जीपीएफ और ग्रेच्युटी के 17 लाख 36 हजार रुपए की धोखाधड़ी के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी लिपिक राहुल मिश्रा ने लिखित कथनों में अपराध स्वीकार कर लिया, इसके बावजूद पखवाड़े भर बाद भी न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई और न ही विभागीय कार्रवाई।

28 दिसंबर को यह मामला मीडिया में उजागर हुआ था, जिसके बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक जांच आगे बढ़ने के बजाय प्रशासनिक पत्राचार और लीपापोती में उलझती नजर आ रही है। सीएमएचओ के पत्र ने खड़े किए सवाल 1 जनवरी को सीएमएचओ द्वारा कलेक्टर को भेजे गए पत्र ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। पत्र में यह उल्लेख किया गया कि राशि एक्सिस बैंक खाते में भेज दी गई है और आरोपी राहुल मिश्रा को सीएमएचओ कार्यालय का कर्मचारी नहीं बताया गया।

हालांकि, उसी पत्र में यह स्वीकार किया गया कि राहुल मिश्रा सिविल सर्जन कार्यालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदस्थ है। इसके बावजूद टीएल प्रकरण विलोपित करने की अनुशंसा कर दी गई, जिससे प्रशासनिक मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लिखित कथन में धोखाधड़ी कबूल पेंशन प्रभारी रहे राहुल मिश्रा ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि उन्होंने सावित्री वर्मा की पूरी 17 लाख 35 हजार 499 रुपए की राशि स्वयं आहरित कर एक्सिस बैंक खाते में जमा की।

आरोपी ने यह भी कहा कि वह राशि लौटाने के लिए दो माह का समय चाहता है और अपनी पैतृक भूमि बेचकर पैसा चुकाने की बात कर रहा है। सवाल यह है कि अपराध स्वीकारने के बाद भी आरोपी अब तक खुलेआम कैसे काम कर रहा है 9 साल से न्याय की आस में भटक रही वृद्ध महिला 72 वर्षीय सावित्री देवी वर्मा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहोरीबंद अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम के पद पर पदस्थ थीं और 31 अगस्त 2016 को सेवानिवृत्त हुई थीं।

उन्हें ग्रेच्युटी और जीपीएफ की कुल 17 लाख 36 हजार 399 रुपए की राशि मिलनी थी, लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद भी एक रुपया तक नहीं मिला। वृद्ध महिला लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रही है।
फर्जी खाता, 144 ट्रांजेक्शन और पूरा पैसा साफ
जांच में सामने आया है कि स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों ने सावित्री वर्मा के नाम से एक्सिस बैंक में फर्जी खाता खुलवाया पहले खाते की जांच के लिए एसबीआई एटीएम से 500 रुपए निकाले गए, इसके बाद करीब 144 बार एटीएम, चेक और नकद माध्यम से पूरी राशि निकाल ली गई।

आशंका है कि यह घोटाला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों की राशि भी इसी तरह हड़पी जा सकती है। शिकायत वापस लेने का दबाव पीड़िता और उसके परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी न्याय दिलाने के बजाय शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। समझौता न करने पर धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। 6 जनवरी को पीड़िता की बेटी रीतू बर्मन ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

बड़ा घोटाला बनने के संकेत

यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला साबित हो सकता है, जिसमें केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।

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