
कटनी शहर की यातायात व्यवस्था की प्रशंसा करने वाले ज़रा इस तस्वीर को गौर से देखें। यह दृश्य कटायाघाट मोड़ का है, जहां दो भारी वाहनों ने ऐसा जाम लगाया कि आम लोगों की रफ्तार थम गई और परेशानियाँ बढ़ गईं।
शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के बावजूद ये वाहन निर्भीक होकर शहर के बीचोंबीच दौड़ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल—यातायात पुलिस इन भारी वाहनों को शहर के अंदर आने की अनुमति क्यों दे रही है? एक तरफ नगर निगम सड़क निर्माण कर रहा है, दूसरी तरफ पुलिस विभाग को जानकारी होने के बावजूद भारी वाहनों को शहर में प्रवेश दिया जा रहा है। नतीजतन शहर की सड़कें और अधिक संकरी, धूलभरी और खतरनाक हो रही हैं।
कटनी का बिगड़ता ट्रैफिक अब किसी से छुपा नहीं है। छोटे वाहनों पर चालानी कार्रवाई कर सुर्खियाँ बटोरने वाली यातायात पुलिस, भारी वाहनों पर कार्रवाई करने में ढिलाई क्यों दिखा रही है? हाल ही में 185 की चालानी कार्यवाही इसका ताज़ा उदाहरण है, लेकिन शहर में असल समस्या तो भारी वाहनों की बेधड़क आवाजाही ही है।
ऐसे माहौल में शहर की आम जनता रोज़ जाम में फंसकर धूल खाने को विवश है। सवाल उठता है—
क्या कटनी का ट्रैफिक सिस्टम सिर्फ छोटे वाहन चालकों पर सख्त है? क्या बड़े और भारी वाहनों के सामने नियम बौने पड़ जाते हैं?
अब वक्त है कि प्रशासन और यातायात विभाग वास्तविक समस्या पर ध्यान दे, नहीं तो कटनी की सड़कों का यह हाल भविष्य में और गंभीर होता जाएगा।






