नवीन केंद्रीय विद्यालय झिंझरी में लॉटरी परिणाम से अभिभावकों में मायूसी – आमजन के सपने फिर अधूरे

कटनी।
कटनी जिले में हाल ही में प्रारंभ हुए नवीन केंद्रीय विद्यालय झिंझरी की लॉटरी सूची जैसे ही सार्वजनिक हुई, कई अभिभावकों के चेहरे खुशी से खिल उठे, लेकिन ज़्यादातर अभिभावक निराशा के सागर में डूबते नज़र आए। जिन माता-पिता ने इस विद्यालय को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद समझा था, उन्हें अब महसूस हो रहा है कि यह सौगात भी मुख्यतः केंद्र व राज्य कर्मियों एवं डिफेंस से जुड़े परिवारों के लिए ही सुलभ है।

सांसद विष्णुदत्त शर्मा के प्रयासों से शुरू किए गए तीसरे केंद्रीय विद्यालय को आमजन के लिए एक उपहार के रूप में प्रस्तुत किया गया था। लेकिन केंद्रीय विद्यालय संगठन की सख्त गाइडलाइन, जिनमें कैटेगरीबद्ध प्राथमिकताएं पहले से निर्धारित हैं, ने इस उम्मीद को झटका दे दिया है।

कटनी जिले के सैकड़ों अभिभावकों ने लंबी लाइनों में खड़े होकर फार्म जमा किए। स्कूलों की ओर से मांगी गई अपार (Aadhar Enabled ID) अनिवार्यता के चलते अभिभावकों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई स्कूलों द्वारा समय पर अपार ID न बनने के कारण परिजनों को बार-बार चक्कर काटने पड़े। बाद में जब मीडिया ने इस मुद्दे को उजागर किया, तब जाकर राहत मिली और अपार आईडी बाद में जमा करने की अनुमति दी गई।

लेकिन इस समूची प्रक्रिया के बाद जब लॉटरी रिजल्ट सामने आया, तो बड़ी संख्या में आम अभिभावकों को मायूसी हाथ लगी। जिन परिवारों ने बच्चों का दाखिला केंद्रीय विद्यालय में सुनिश्चित मानकर योजना बनाई थी, वे अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

अब सवाल उठता है कि क्या यह राजनीतिक प्रयास वास्तव में आमजन के लिए कारगर रहा? क्या यह ‘जनता को मिली सौगात’ कहलाने योग्य है, जब ज़्यादातर गैर-सरकारी पृष्ठभूमि के बच्चों को इसमें प्रवेश ही न मिल सका?

निष्कर्ष….
तीसरा केंद्रीय विद्यालय भले ही जिले के लिए नई उपलब्धि हो, लेकिन इसकी प्रवेश प्रणाली ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘सभी के लिए शिक्षा’ का सपना अभी अधूरा है। जो उम्मीदें सांसद प्रयासों से जुड़ी थीं, वह ज़मीन पर उतरते ही नीतिगत पेंच में उलझ गईं।

लाइन लगाकर लिए गए फॉर्म

सुबह 5:00 बजे से बच्चों के अभिवावक अपना जरूरी काम छोड़ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ी संख्या में लाइन में लगकर फॉर्म लेने पहुंचे थे उन्हें उन्हे क्या पता था केंद्रीय विद्यालय की गाइडलाइन उनके सपने धराशाई कर देगी।वही बात करें तो आम जनता को मिली सौगात कह राजनीतिक गलियारों ने वावाही तो बटोर ली गई लेकिन जब फॉर्म भरे गए तो उसमें केंद्रीय विद्यालय की गाइड लाइन आम जनता पर क्यों थोप दी गई यह बड़ा सवाल बना हुआ है?

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