
कटनी। कटनी नगर निगम क्षेत्र में स्थित तालाबों का अस्तित्व लगातार खतरे में पड़ता जा रहा है। ताज़ा मामला शहर के दुर्गा चौक स्थित निस्तारित तालाब का सामने आया है, जहाँ वर्षों पहले किए गए कब्ज़े के बाद अब उसी कब्ज़े को पुख्ता करते हुए मकान को डबल मंज़िल बनाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र जलभराव क्षेत्र है और आज भी तालाब में पानी मौजूद है, इसके बावजूद खुलेआम निर्माण कार्य जारी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह वही तालाब है जिससे कभी ग्रीष्मकाल में आसपास के रहवासियों को पानी की सुविधा मिलती थी। धीरे-धीरे पहले तालाब की सीमाएं तोड़ी गईं, फिर उस पर कब्ज़ा किया गया और अब पक्के निर्माण के जरिए तालाब के अस्तित्व को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
जलभराव क्षेत्र में निर्माण, भविष्य में बड़ा खतरा
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तालाब जैसे प्राकृतिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण से न सिर्फ जल संकट बढ़ेगा, बल्कि बरसात के मौसम में जलभराव, सड़क डूबने और मकानों में पानी भरने जैसी गंभीर समस्याएं भी खड़ी होंगी। बावजूद इसके, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
नगर निगम की भूमिका पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतने स्पष्ट जलभराव क्षेत्र में निर्माण कैसे हो रहा है? क्या नगर निगम को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो निर्माण रोका गया और न ही कब्जाधारियों पर कोई कार्रवाई की गई।
स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि—तालाब की भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए अवैध निर्माण को अलग किया जाए भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी कार्रवाई की जाए
लोगों का कहना है कि अगर अभी भी प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में कटनी शहर को भीषण जल संकट और जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
अब निगाहें प्रशासन पर
फिलहाल यह देखना अहम होगा कि नगर निगम और प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक कार्रवाई करता है, या फिर शहर के तालाब इसी तरह कब्ज़ों की भेंट चढ़ते रहेंगे।







