गोसलपुर स्टेशन पर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल टीम ने किया संयुक्त मॉक ड्रिल अभ्यास…. गोसलपुर में दुर्घटना होने की सूचना पर तीव्र गति से बचाव कार्य में रेलवे ने प्रस्तुत की मिसाल”

newsvoiceofindia 

जबलपुर।जबलपुर रेल मंडल के गोसलपुर स्टेशन पर मंगलवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया जब गाड़ी क्रमांक 01089 डाउन कोचिंग स्पेशल के लोको पायलट ने 18:55 बजे सूचना दी कि ट्रेन के तीन कोच अचानक तेज झटके के साथ पटरी से उतर गए हैं। ब्रेक प्रेशर जीरो हो गया है और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। सूचना मिलते ही जबलपुर रेलवे कंट्रोल ऑफिस में खतरे के सायरन बज उठे। तुरंत दुर्घटना राहत मेडिकल वैन और रिलीफ ट्रेन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल, बोगियों के एक-दूसरे पर चढ़ने की स्थिति और 29 यात्रियों के घायल तथा 1 की मृत्यु की आशंका का दृश्य तैयार किया गया। राहत और बचाव कार्य के लिए रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

लेकिन कुछ ही देर बाद साफ हुआ कि यह कोई वास्तविक हादसा नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) द्वारा आयोजित एक संयुक्त फुल स्केल मॉक ड्रिल थी। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे और राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तत्परता और समन्वय को परखना था।

प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी श्री प्रवीन खोराना एवं मंडल रेल प्रबंध कमल कुमार तलरेजा के मार्गदर्शन में आयोजित इस मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, सिविल पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल सहित कई एजेंसियों ने भाग लिया।

बोगियों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने, अस्थायी चिकित्सा कक्ष स्थापित करने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और राहत कार्य को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने का संयुक्त अभ्यास किया गया। रात 21:45 बजे इस पूरी घटना को आधिकारिक रूप से मॉक ड्रिल घोषित किया गया।

रेलवे कंट्रोल ऑफिस जबलपुर, सिहोरा और गोसलपुर स्टेशनों पर यात्री सहायता डेस्क भी स्थापित किए गए थे, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सूचना और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

इस अभ्यास में संरक्षा, यांत्रिक, कर्षण, अभियांत्रिकी, वाणिज्य, चिकित्सा, कार्मिक विभाग सहित स्काउट गाइड और अन्य रेल कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

रेल प्रशासन के अनुसार इस तरह की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और संभावित कमियों की पहचान कर उन्हें सुधारना है, ताकि वास्तविक संकट की स्थिति में जानमाल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

Leave a Comment

SANSKRITIIAS , IAS COACHING
[democracy id="1"]
SANSKRITIIAS , IAS COACHING