“मुख्यमंत्री मोहन यादव का सख्त एक्शन, दूषित पानी पर बड़ी कार्यवाही नगर निगम के बड़े अधिकारी हटाए गए” 

 

इंदौर। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से फैली गंभीर बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 200 लोग बीमार होकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार सुबह एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में जल आपूर्ति व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आईं, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

नगर निगम के अफसरों पर गिरी गाज

दूषित पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया। वहीं नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में उन्हें भी पद से हटा दिया गया। इसकी पुष्टि स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की।
जल वितरण विभाग से छीनी गई जिम्मेदारी
सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश का पालन करते हुए अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को इंदौर से हटाकर भोपाल स्थानांतरित कर दिया है। इसके साथ ही जल वितरण कार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री से विभागीय प्रभार वापस ले लिया गया है। जल वितरण विभाग के इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से भी जिम्मेदारी छीन ली गई है।

मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूषित पेयजल आपूर्ति जैसे गंभीर मामलों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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