जनसुनवाई या औपचारिकता? 12 साल से न्याय की राह देख रही पीड़ित महिला”

कटनी। मध्यप्रदेश सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था आम जनता की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन कटनी जिले के बड़वारा तहसील की एक महिला का दर्द इस व्यवस्था की हकीकत बयां करता है।

कटनी जिले की तहसील बड़वारा के ग्राम सकरी की रहने वाली विमला चक्रवर्ती पिछले कई वर्षों से न्याय की गुहार लगा रही हैं। उनका कहना है कि ग्राम करुआ काप में उनकी खेती की जमीन में पानी भरने से तीन एकड़ की फसल नष्ट हो गई। इससे उन्हें करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ।

विमला चक्रवर्ती का आरोप हैं कि विगत 10–12 वर्षों से लगातार शिकायत के बावजूद न तो पटवारी पहुंचे, न ही राजस्व निरीक्षक यहां तक कि जिला और तहसील स्तर पर कई बार शिकायत करने तथा हर मंगलवार को जनसुनवाई में आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही हर मंगलवार को चक्कर काटती हूं लेकिन आज तक न कोई जांच हुई, न मुआवज़ा मिला।


जनसुनवाई का उद्देश्य लोगों को त्वरित न्याय और समाधान देना है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। महिलाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की व्यवस्थाएं भी उनके मामले में फेल होती दिख रही हैं।

जब शिकायतों के बाद भी न्याय नहीं मिलता तो सवाल उठता है कि ऐसी जनसुनवाई का औचित्य क्या है। लोग अब इस व्यवस्था को केवल एक औपचारिकता कहने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।

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