
कटनी आरटीओ द्वारा ई रिक्शा वाहनों के किए रूट निर्धारित शहर की विगडेल यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने यातायात विभाग और आरटीओ विभाग सक्रिय नजर आ रहा है देखा जाए तो शहर में लगभग 5 हजार ऑटो रिक्शा वा तीन से 4 हजार ई रिक्शा के रजिस्ट्रेशन आरटीओ विभाग में पंजीकृत है गोरतलब है की शहर छोटा होने की वजह से वाहनों की संख्या अधिक होने से शहर की यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है आरटीओ विभाग ने पहले तो लमसम वाहनों के रजिस्ट्रेशन कर दिए लेकिन इस पर विचार नहीं किया कि यह वाहन शहर की सड़कों पर जब अधिक हो जाएंगे तो यातायात की सुचारू व्यवस्था खराब हो जायेगी अगर बात करे शासन की गाइडलाइन के अनुसार अधिक वाहनों को देखते हुए पहले 15 साल के रजिस्टर्ड वाहनों को खत्म किया जाता है। लेकिन वह भी शहर की सड़कों पर फर्राटे भरते हुए नजर आही जाते हैं जिसका मुख्य कारण शहर की यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है इस पर विभाग काम करने में शायद रुचि नहीं दिखा रहा लेकिन नए रजिस्ट्रेशन किए हुए वाहनों को रूट में किस दिशा पर चलाया जाए जिससे शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे इस पर ध्यान केंद्रित आरटीओ विभाग का देखने को जरूर मिल रहा है साथ ही नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन होने पर राजस्व की बढ़ोतरी के साथ साथ मौजूद दलालों से जेब गीली हो सके इस पर अपनी रुचि आरटीओ विभाग जरूर दिखा रहा है नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया से शहर की सड़कों पर भले ही जगह ना रहे। शहर पर अवेध अतिक्रमण कैसे अलग किया जाए इस और ध्यान ना तो पुलिस प्रशासन का है और ना ही जिला प्रशासन का कटनी के हृदय स्थल सुभाष चौक से लेकर स्टेशन रोड तक बीच पार्किंग में खड़े वाहनों पर चलानी कार्यवाही की मुहिम भी यातायात पुलिस की ठंडे बस्ते में चली गई और बीच पार्किंग में वाहन लगने से कार को निकलना पड़े तो जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है इस दौरान घंटो लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है यही बात खत्म नहीं होती मिशन चौक का अंडर ब्रिज में अगर एक वाहन फंस जाए तो जाम की वजह से लोगों का पसीना छूटने लगता है लगे जाम में यातायात पुलिस भी परेशान होते हुए नजर आती है क्या रूट बना देने से इस समस्या से लोगों को छुटकारा मिल पाएगा यह देखने वाली बात होगी या फिर आम जनता को हमेशा लगने वाले जाम का सामना हमेशा करना पड़ेगा। लगातार ट्रैफिक चेकिंग के दौरान जनता को भारी शुल्क अदा तो जरूर करना पड़ रहा है लेकिन जनता की कितनी फिक्र यातायात विभाग और आरटीओ को है यह किसी से छुपी नहीं है क्या ऑटो रिक्शा और ई रिक्शा का रूट निर्धारण कर देने से जाम की समस्या से आम जनता को छुटकारा मिलेगा या आम जनता जाम में फंस कर अपना पसीना ही बहाती रहेगी।
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