
कटनी। रेलवे स्टेशन के आउटर क्षेत्रों में अपराधों पर नियंत्रण और वारदात के बाद आरोपियों की पहचान के लिए लगाए गए CCTV कैमरे इन दिनों खुद ही निगरानी से बाहर नजर आ रहे हैं। रेल पुलिस की यह ‘तीसरी आंख’ बंद होने से आउटर क्षेत्रों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग प्रभावित हो रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होने की आशंका बनी हुई है।
रेलवे के आउटर क्षेत्र यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। आरोप है कि इन इलाकों में बदमाश यात्रियों के मोबाइल और सामान पर हाथ साफ करने के साथ ही चोरी और छीना-झपटी जैसी वारदातों को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं। ऐसे में यदि घटनास्थल या आसपास लगे CCTV कैमरे ही काम नहीं कर रहे हैं, तो वारदात के बाद आरोपियों तक पहुंचना GRP के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
हाल ही में पदभार संभालने वाले रेल पुलिस अधीक्षक ने रेल परिक्षेत्र के शैडो एरिया का निरीक्षण कर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए मौके की गतिविधियों की जांच की थी और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद आउटर क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की स्थिति सवाल खड़े कर रही है।
सवाल यह है कि जब रेलवे आउटर की गतिविधियां CCTV में रिकॉर्ड ही नहीं होंगी, तो मोबाइल लूट, ट्रेन में चोरी और यात्रियों से छीना-झपटी जैसी वारदातों में आरोपियों की पहचान कैसे होगी?
एक तरफ अपराध होने के बाद GRP अधिकारियों द्वारा बल की कमी को बड़ी चुनौती बताया जाता है, वहीं दूसरी तरफ निगरानी के लिए लगाए गए CCTV कैमरों के बंद या प्रभावी ढंग से काम नहीं करने से पुलिस की जांच और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कैमरे बंद होने की स्थिति में अपराधी वारदात को अंजाम देकर आसानी से निकल जाते हैं और पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने के लिए दूसरे माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे न सिर्फ जांच प्रभावित होती है, बल्कि रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या रेल पुलिस अधीक्षक इस मामले को संज्ञान में लेकर आउटर क्षेत्रों के बंद CCTV कैमरों को तत्काल दुरुस्त कराने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे?






