
NewsVoiceofIndia/
कटनी के बहुचर्चित जमीन सौदेबाजी और पद के दुरुपयोग मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जिला एवं सत्र न्यायालय कटनी के प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शनिवार, 29 अगस्त को निलंबित सीएसपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अग्रिम जमानत को लेकर अदालत में लगातार दो दिनों तक सुनवाई चली। शनिवार को दोपहर से शाम तक करीब पांच घंटे तक अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। प्राप्त जानकारी के मताबिक बचाव पक्ष की ओर से अंतरिम राहत की मांग की गई थी, लेकिन अभियोजन पक्ष और एसआईटी की ओर से प्रस्तुत किए गए दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया।
जिला अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों के सामने हाईकोर्ट का रास्ता बचा है। हालांकि, हाईकोर्ट से किसी तरह की अंतरिम राहत मिलने तक पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं, एफआईआर दर्ज होने के बाद से फरार चल रहीं निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, मुख्य फाइनेंसर क्षितिज राज बारापात्रे और कथित कागजी खरीदार मारूफ अहमद हनफी पर पुलिस ने शिकंजा और कस दिया है। तीनों की गिरफ्तारी पर पुलिस विभाग की ओर से 10-10 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया है।
जबलपुर एएसपी अंजना तिवारी के नेतृत्व में गठित आठ सदस्यीय एसआईटी मामले की जांच कर रही है। टीम दर्ज बयानों, बैंक लेनदेन और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
सूत्रों के मुताबिक, अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद एसआईटी सीज पड़े सीएसपी कार्यालय की जांच आगे बढ़ा सकती है और वहां मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं डिजिटल रिकॉर्ड को कब्जे में लेने की कार्रवाई कर सकती है।
इधर, 10 हजार रुपये के इनाम और अदालत से जमानत खारिज होने के बाद साइबर सेल और पुलिस की विशेष टीमें फरार आरोपियों तथा उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
फिलहाल इस मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अगली कानूनी कार्रवाई और एसआईटी की जांच पर टिकी हैं।







