
जबलपुर। भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से सुविधाजनक, सुरक्षित एवं पारदर्शी सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में पश्चिम मध्य रेल सक्रिय रूप से प्रयासरत है। और विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।
पश्चिम मध्य रेल के तीनों मंडलों जबलपुर, भोपाल एवं कोटा में पीआरएस (Passenger Reservation System) एवं यूटीएस (Unreserved Ticketing System) काउंटर्स पर यूपीआई/भीम, मोबाइल टिकटिंग तथा पीओएस मशीनों के माध्यम से कैशलेस भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों को ट्रेनों एवं स्टेशन परिसरों में डिजिटल माध्यमों से टिकट खरीदने और भुगतान करने हेतु भी प्रेरित किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दूसरे माह मई में पश्चिम मध्य रेल ने पीआरएस एवं यूटीएस के माध्यम से कुल 15,16,423 यात्रियों से ₹14,13,15,304 का कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रेलवे राजस्व अर्जित किया।
पीआरएस के अंतर्गत पीओएस मशीनों से ₹12,16,395 तथा यूपीआई/भीम ऐप से ₹5,54,84,864 का राजस्व प्राप्त हुआ।
यूटीएस प्रणाली में मोबाइल टिकटिंग से ₹1,71,22,315 एवं यूपीआई/भीम ऐप से ₹6,74,91,730 का राजस्व अर्जित किया गया।
डिजिटल भुगतान के लाभ
डिजिटल भुगतान प्रणाली से यात्रियों को नकद धनराशि ले जाने की आवश्यकता समाप्त होती है, जिससे समय की बचत के साथ-साथ लेन-देन में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होती है। रेलवे द्वारा अपनाए गए सभी डिजिटल भुगतान माध्यम उन्नत एन्क्रिप्शन एवं डेटा प्रमाणीकरण तकनीकों से सुरक्षित बनाए गए हैं।
पश्चिम मध्य रेल अपने तीनों मंडलों में डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सशक्त एवं सुलभ बनाने हेतु निरंतर प्रयास कर रही है। भविष्य में अधिक से अधिक यात्रियों को कैशलेस ट्रांजेक्शन से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान एवं तकनीकी विस्तार पर विशेष ध्यान देने की बात की जा रही है।






