“जिला अस्पताल में आवारा कुत्तों का आतंक! सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवहेलना”

कटनी। देश में लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट यानी कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही गहरी चिंता जता चुका है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने साफ कहा है—“हालात अब अलार्मिंग हैं… जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए थे कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, खेल परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को तत्काल हटाया जाए, और सभी राज्यों व स्थानीय निकायों को ठोस नीति लागू करने के आदेश दिए थे।

लेकिन—कटनी में हालात इसके बिल्कुल उलट हैं।

जिला अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों का झुंड! मरीज और परिजन दहशत में

यह तस्वीर 4 दिसंबर, गुरुवार की है, जब कटनी जिला अस्पताल के सर्कुलेटिंग एरिया में आवारा कुत्तों का झुंड खुलेआम घूमता नजर आया। मरीजों और परिजनों में खौफ का माहौल बना हुआ है, लेकिन नगर निगम की बेफिक्री साफ दिखाई दे रही है।

एक दिन में 30–40 डॉग बाइट केस!

मिली जानकारी के अनुसार,
कटनी जिले में प्रतिदिन 30 से 40 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। हर वार्ड में आवारा कुत्तों के झुंड आसानी से देखे जा सकते हैं। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। इन्हीं बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया—“जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है… अब किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं।”

अब निगाहें जिला प्रशासन और नगर निगम पर

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और नगर निगम इस गंभीर समस्या पर कितना सख्त और कितना त्वरित एक्शन लेते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होगा, या कटनी में आवारा कुत्तों का खतरा यूं ही बढ़ता रहेगा?

 

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