
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में पहुंची मुंबई निवासी महज 10 साल की मासूम सिया देशपांडे जो अपनी मां अश्वनी देशपांडे के साथ साइकिल से नर्मदा परिक्रमा कर रही है। कहते है जहां चाह है बहाँ राह है यह कहावत चरितार्थ की है महज 10 साल की मासूम सिया देशपांडे ने वह अभी पांचवी क्लास की छात्रा है सिया बीते एक माह से अपनी माँ अश्वनी देशपांडे के साथ अलग अलग साइकिल पर मां नर्मदा की परिक्रमा कर रही है जो विगत एक माह पहले 4 जनवरी को उनकी मां और सिया की यह यात्रा ओंकारेश्वर से शुरू हुई मां और बेटी की मां नर्मदा परिक्रमा गुजरात से होते हुए मप्र के रायसेन जिले में पहुंची लगभग 3500 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा यात्रा वह भी साइकल से 10 साल की सिया ओर सिया की माँ अकेले कर रहीं है बतादे यह अपने आप में एक मिसाल है ओर मां नर्मदा की एक सच्ची सेवा है।
बहरहाल मुंबई जैसे महानगर से अपनी छोटी मासूम बच्ची को इतनी बड़ी यात्रा पर लेकर निकलना किसी चुनोती से कम नही है।सिया की माँ अश्वनी देशपांडे कहती है हमारे देश की संस्कृति ओर मां नर्मदा की महत्वता समझाने के लिए बेटी को साथ लेकर निकली हूँ।
दरासल मुंबई में म्यूच्यूअल फंड सेक्टर से जुड़ी अश्वनी देशपांडे का कहना है मेरी बेटी 5 वी क्लास की छात्रा है पहले हमारा कार से नर्मदा परिक्रमा करने का विचार था लेकिन सिया के कहने पर हमने साइकल से यात्रा को शुरू किया जिसमे हमारे परिवार का पूरा सपोर्ट है रोज घर पर बात होती है
एक मां लंबी यात्रा पर अपनी एकलौती बेटी को मां नर्मदा परिक्रमा पर लेकर एक माह से चल रही है अश्वनी देशपांडे और उनकी बेटी सिया देशपांडे दो अलग-अलग साइकल पर साथ-साथ चलकर रोज 50 से 60 किलोमीटर का सफर तय करती है जिन्हे मां नर्मदा की परिक्रमा पूरी करने में लगभग 25 दिन ओर लगेंगे अश्वनी देशपांडे बताती है स्कूल से स्पेशल छुट्टी लेकर हम बेटी को लेकर चले है।इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूछा अकेले चलने में कोई दिक्कत तो नही आती तो उनका कहना था लोग इतने धार्मिक है और इतने सहयोगी है तो कही हमे दिक्कत नही है दिन में चलते है ओर रात कही सुरक्षित जगह रुककर आगे की यात्रा तय करते है रायसेन से दोनों मा बेटी अमरकंटक की और नर्मदा यात्रा पर रवाना हुई है वहां से ओमकरेश्वर पहुचकर अपनी यात्रा का समापन करेगी।






