“कटनी में जिला वॉश समिति का गठन, पेयजल और स्वच्छता कार्यों की होगी प्रभावी मॉनिटरिंग”

कटनी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशानुसार कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा जिले में जिला वॉश समिति एवं जिला वॉश तकनीकी समिति का गठन किया गया है। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य जिले में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता से जुड़े कार्यों की प्रभावी निगरानी तथा उनका सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

 

जिला वॉश समिति की अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष होंगी, जबकि जिला पंचायत सीईओ को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल निगम, मनरेगा, जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों सहित जिला वॉश प्रभारी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

समिति की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जाएगी। बैठकों में ग्राम पंचायतों द्वारा संचालित पेयजल एवं स्वच्छता कार्यों की समीक्षा के साथ सूचीबद्ध एजेंसियों के कार्यों का मूल्यांकन और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।वहीं, जिला वॉश तकनीकी समिति के अध्यक्ष जिला पंचायत सीईओ होंगे। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई हैतकनीकी समिति द्वारा वृहद मरम्मत कार्यों के लिए जनपद स्तर पर एजेंसियों का एमपैनलमेंट किया जाएगा। प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 3 और अधिकतम 5 एजेंसियों को सूचीबद्ध किया जाएगा। निविदा प्रक्रिया सदस्य सचिव द्वारा संचालित की जाएगी और समिति द्वारा इसका अनुमोदन किया जाएगा। स्वीकृत एजेंसियों की जनपदवार सूची पंचायत दर्पण पोर्टल पर भी अपलोड की जाएगी।

एजेंसियों का एमपैनलमेंट दो वर्षों के लिए मान्य रहेगा और इसके बाद पुनः निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होगी। नई एजेंसियों के चयन तक अधिकतम छह माह की अवधि के लिए पुरानी एजेंसियों से कार्य कराया जा सकेगा। यदि किसी एजेंसी का कार्य असंतोषजनक पाया जाता है, तो ग्राम पंचायत के आवेदन और जनपद वॉश तकनीकी समिति की अनुशंसा के आधार पर जिला वॉश तकनीकी समिति उसका एमपैनलमेंट निरस्त कर सकती है। साथ ही संबंधित एजेंसी को दो वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकेगा।

 

इसके अलावा ग्राम पंचायत पदाधिकारियों, पानी समिति के सदस्यों तथा पंप एवं वॉल्व ऑपरेटरों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं स्वच्छता सेवाओं की गुणवत्ता और संचालन व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

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