
कटनी जिले के बरही में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। बरही अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने एकजुट होकर विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के नाम उनके निजी कार्यालय पहुंचकर कार्यालय प्रभारी लालजी मिश्रा को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
सेवा गणना बना बड़ा मुद्दा
ज्ञापन में शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि 1 जुलाई 2018 को नवीन शैक्षणिक संवर्ग में शामिल किए गए शिक्षकों की सेवा अवधि उनकी पहली नियुक्ति तिथि से जोड़ी जाए साथ ही IFMS पोर्टल पर दर्ज 1 जुलाई 2018 की तिथि हटाकर वास्तविक नियुक्ति दिनांक दर्ज करने की मांग की गई, ताकि पदोन्नति, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसे अधिकार सुरक्षित रह सकें।
TET अनिवार्यता पर सीधा विरोध
शिक्षकों ने आरटीई 2009 के तहत टीईटी को अनिवार्य बनाए जाने को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की। उन्होंने 1 सितंबर 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और 3 मार्च 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश को निरस्त करने की भी मांग उठाई।
5 लाख परिवारों पर संकट का दावा
संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी कि TET अनिवार्यता से प्रदेश के करीब 5 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में है, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही, शिक्षकों में मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति भी बढ़ रही है।
आंदोलन का ऐलान मांगें पूरी नहीं होने पर शिक्षकों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है— 8 अप्रैल: जिला स्तर पर धरना
11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर ज्ञापन
18 अप्रैल 2026: भोपाल में विशाल महाधरना
बरही से उठी यह आवाज अब पूरे मध्यप्रदेश में बड़ा आंदोलन बन सकती है। यदि समय रहते सरकार ने समाधान नहीं निकाला, तो यह आक्रोश सड़कों पर उग्र रूप ले सकता है। इस दौरान राम भुवन विश्वकर्मा, आशीष उर्मलिया समेत सैकड़ों शिक्षकों की उपस्थिति रही।






