“छोटी महानदी पर रेत माफिया का कहर! राजनीतिक संरक्षण के आरोप, शिकायत के बाद भी नहीं रुक रहा अवैध उत्खनन”

कटनी जिले की बड़वारा तहसील में अवैध रेत उत्खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन भले ही अवैध उत्खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
बड़वारा थाना क्षेत्र के बसाड़ी ग्राम से गुजरने वाली छोटी महानदी की मोहरा खदान में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन का खेल जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया बेखौफ होकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए नदी से रेत निकालकर खुलेआम परिवहन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोग लंबे समय से इस अवैध कारोबार में लगे हुए हैं और कथित तौर पर उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। इसी कारण वे ग्रामीणों को धौंस दिखाते हुए बिना किसी डर के रेत का अवैध खनन और परिवहन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि इस अवैध उत्खनन से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बावजूद इसके प्रशासन और पुलिस इस मामले में गंभीर कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब भी अवैध उत्खनन की सूचना बड़वारा पुलिस को दी जाती है, तो रेत माफिया पहले ही सतर्क हो जाते हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही माफिया अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली मौके से हटा लेते हैं, जिससे मौके पर पहुंचने तक सब कुछ सामान्य दिखाई देता है।
यदि ग्रामीणों के ये आरोप सही हैं, तो यह खाकी और खनन माफिया के बीच संभावित सांठगांठ की ओर इशारा करता है। यही वजह है कि क्षेत्र में अवैध उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या छोटी महानदी को रेत माफिया के कब्जे से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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