
एंकर – कटनी शहर का हृदय स्थल सुभाष चौक, जहां से रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग गुजरता है। लेकिन त्योहार आते ही इस मुख्य मार्ग की तस्वीर बदल जाती है। यहां फुटकर दुकानदारों को दुकानें लगाने की अनुमति दे दी जाती है और देखते ही देखते पूरा रास्ता बाजार में तब्दील हो जाता है। नतीजा यह कि आम नागरिकों, रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और उन्हें घूम कर जाना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि शहर में शांति, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए बैठकें आयोजित की जाती हैं, निर्णय भी लिए जाते हैं, लेकिन उन निर्णयों का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है, यह सुभाष चौक की स्थिति देखकर समझा जा सकता है।
त्योहारों के दौरान यातायात डायवर्ट करने के लिए बैरिकेडिंग तो कर दी जाती है, लेकिन कमानिया गेट से साधुराम स्कूल तक बाजार के समय पैदल निकलना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता। मुख्य मार्ग पर सजी दुकानों और उमड़ती भीड़ के कारण रास्ता संकरा हो जाता है। इसका असर न केवल आम जनता पर पड़ता है, बल्कि यातायात संभालने में तैनात पुलिस बल को भी अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है।
जबकि सवाल यह है कि क्या इन फुटकर दुकानों को साधुराम स्कूल के प्रांगण में लगाने की व्यवस्था नहीं की जा सकती? यदि ऐसा विकल्प मौजूद है तो फिर रेलवे स्टेशन के मुख्य मार्ग को ही बाजार बनाने की अनुमति क्यों दी जाती है?
एक तरफ पुलिस प्रशासन प्रेस नोट जारी कर नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और आपात स्थिति में कंट्रोल रूम को सूचना देने की अपील करता है। लेकिन दूसरी तरफ जब मुख्य मार्ग ही दुकानों और भीड़ से घिर जाएगा, तो यातायात नियमों का पालन और आपात स्थिति में आवागमन कैसे संभव होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि त्योहारों की रौनक बनाए रखने के नाम पर आम जनता की राह मुश्किल क्यों बनाई जा रही है? क्या प्रशासन इस व्यवस्था पर पुनर्विचार कर बाजार के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय करेगा, या फिर हर त्योहार में सुभाष चौक से रेलवे स्टेशन तक आम नागरिक इसी परेशानी से जूझते रहेंगे?








