“सड़क पर निर्माण सामग्री, खुली नाली बनी हादसे का खतरा—दशहरा पर्व में भी सुरक्षा इंतजाम नदारद”

 

कटनी/ कैमोर! पेट्रोल पंप से एवरेस्ट रामलीला ग्राउंड की ओर जाने वाली मुख्य सड़क से लगी एवरेस्ट फाइबर सीट निर्माण कंपनी के अधिकारियों की रहवासी कॉलोनी में इन दिनों नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान सड़क किनारे निर्माण सामग्री रखे जाने और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने से राहगीरों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। यह मार्ग 24 घंटे व्यस्त रहता है। इसी रास्ते से भारी वाहनों की आवाजाही के साथ स्कूल जाने वाले बच्चे, कंपनी में कार्यरत मजदूर और आसपास के ग्रामीण एवं शहरवासी आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क के किनारे निर्माण सामग्री का बिखरा होना और निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा संकेतक, बैरिकेडिंग एवं अन्य रोड सेफ्टी उपकरण नहीं लगाए जाना गंभीर चिंता का विषय है।

छह माह पहले खुली नाली में गिरने से हुई थी गाय की मौत

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब छह माह पहले भी इसी क्षेत्र में विचरण करते समय एक गाय खुली नाली में गिर गई थी। नाली से बाहर नहीं निकल पाने के कारण गाय की मौत हो गई थी। इसके बावजूद वर्तमान निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती जा रही है, तो भविष्य में किसी व्यक्ति या वाहन के साथ भी गंभीर दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

दशहरा पर्व में बढ़ी आवाजाही, रात में भी रहता है आवागमन

वर्तमान में दशहरा पर्व चल रहा है। एवरेस्ट रामलीला ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रमों के चलते रात के समय भी इस मार्ग पर ग्रामीणों और शहरवासियों की आवाजाही बढ़ गई है। अंधेरे में बिना चेतावनी संकेत और पर्याप्त बैरिकेडिंग के निर्माण स्थल राहगीरों के लिए और अधिक जोखिमपूर्ण बन सकता है।

कंपनी प्रबंधन से सुरक्षा मानकों के पालन की मांग

स्थानीय नागरिकों ने एवरेस्ट फाइबर सीट निर्माण कंपनी के प्रबंधक, एचआर हेड एवं सुरक्षा विभाग से मांग की है कि निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा के सभी आवश्यक मानकों का पालन कराया जाए। सड़क पर रखी निर्माण सामग्री को व्यवस्थित स्थान पर कराया जाए तथा बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिव संकेतक, चेतावनी बोर्ड, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक रोड सेफ्टी उपकरण लगाए जाएं, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।

सवाल यह है कि जब इस मार्ग पर चौबीसों घंटे भारी वाहनों के साथ आम नागरिकों और स्कूली बच्चों की आवाजाही रहती है, तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही आखिर क्यों?

 

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