पहली बारिश में डूबी मुड़वारा स्टेशन की नई सड़क, अमृत भारत योजना के कार्यों पर उठे सवाल

कटनी। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन पुनर्विकास योजना के तहत कटनी जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का तेजी से विकास किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और रेलवे परिसरों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए विभिन्न निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। लेकिन मुड़वारा रेलवे स्टेशन के सामने बनी नई सीसी रोड पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। शुकवार सुबह हुई हल्की बारिश के बाद मुड़वारा रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश मार्ग के सामने जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। सड़क पर बड़ी मात्रा में पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस स्थान पर नई सीसी रोड का निर्माण किया गया है, वहां पहले भी बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या बनी रहती थी। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी और रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई।

जानकारों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान यदि एप्रोच रोड की ऊंचाई बढ़ाई जाती अथवा पर्याप्त ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाता, तो इस समस्या से बचा जा सकता था। लेकिन निर्माण कार्य में इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसका परिणाम पहली ही बारिश में सामने आ गया।

कटनी जिले के तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन—कटनी मुख्य जंक्शन, मुड़वारा रेलवे स्टेशन और कटनी साउथ रेलवे स्टेशन—अमृत भारत योजना के तहत विकसित किए जा रहे हैं।

कटनी मख्य स्टेशन का मेन रास्ता

इनमें कई निर्माण कार्य पूरे भी हो चुके हैं, लेकिन मुड़वारा रेलवे स्टेशन के सामने जलभराव की स्थिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर गंदा पानी जमा होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को जोखिम उठाकर निकलना पड़ रहा है। वहीं पैदल यात्रियों को पानी से बचने के लिए लंबा और घुमावदार रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और निर्माण एजेंसी से जल्द से जल्द समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो आगामी मानसून में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी और निर्माण एजेंसी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधार कार्य कराते हैं या फिर आने वाले दिनों में यात्रियों और आम नागरिकों को इसी तरह जलभराव के बीच आवागमन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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