
कटनी | ढीमरखेड़ा: न्यूज़ वॉइस ऑफ़ इंडिया
वन्यजीवों की तस्करी न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि यह जैव विविधता पर भी सीधा प्रहार करती है। ऐसे ही एक संगीन मामले में कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र में वन विभाग की टीम को बड़ी सफलता मिली है। दुर्लभ और संकटग्रस्त जीव पैंगोलिन की तस्करी की कोशिश में लिप्त आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
गुप्त सूचना से रंगे हाथों गिरफ्तारी
ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र अंतर्गत कार्यरत वन विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग अवैध रूप से एक पैंगोलिन को पकड़कर उसकी तस्करी की योजना बना रहे हैं। विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी शुरू की और आरोपियों को पैंगोलिन सहित रंगे हाथों पकड़ लिया।
पैंगोलिन: संकटग्रस्त जीव और तस्करी का मुख्य निशाना
पैंगोलिन एक विलुप्तप्राय स्तनधारी जीव है, जिसकी विशेषता उसके शरीर पर मौजूद कठोर शल्क (स्केल्स) हैं। ये शल्क केराटिन से बने होते हैं, वही तत्व जो मनुष्य के नाखून और बालों में पाया जाता है। पैंगोलिन की यह दुर्लभ संरचना उसे पारंपरिक चिकित्सा और अंतरराष्ट्रीय तस्करी बाजार में अत्यधिक मूल्यवान बनाती है।
खतरे के समय पैंगोलिन स्वयं को गोल आकार में समेट कर सुरक्षा की कोशिश करता है, लेकिन यही स्वाभाविक प्रवृत्ति तस्करों के लिए उसे पकड़ना आसान बना देती है। विश्व भर में 8 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में दो – भारतीय पैंगोलिन और चीनी पैंगोलिन – संरक्षित श्रेणी में शामिल हैं।
प्रशासन और वन विभाग की सजगता से मिली सफलता
यह कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। ऐसे मामलों में शीघ्र कार्रवाई कर आरोपियों को न्यायालय तक पहुँचाना कानून व्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
पैंगोलिन जैसे संकटग्रस्त जीवों की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन विभाग की इस सफलता से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि वन्यजीवों की तस्करी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






