
कटनी- नदियों का अस्तित्व किस तरह खतरे में है यह तस्वीर बया कर रही है शहर की जीवन दयनीय नदी कही जाने वाली कटनी नदी हो या फिर सिमरोल नदी जो कभी निर्मल और स्वच्छ नदियों में शुमार थी आज उन नदियों का अस्तित्व हमारी जरूरत के कारण खत्म होने की कगार पर है। ऐसा नहीं है कि इसमें सिर्फ प्रशासन ही दोषी है इसमें उतना आप और हम भी दोषी हैं। इन नदियों का अस्तित्व खतरे में क्यों है उसकी वजह है। शहर में आस पास के क्षेत्र में बढ़ रही घनी आबादी एवम उन कॉलोनियो का वेस्टेज पानी जो नालियों द्वारा इन नदियों में गिराया जा रहा है। “कहावत है जल ही जीवन है” जब नदीयो का अस्तित्व नहीं रहेगा तो जीवन लोगो का कैसे बचेगा अगर विकास हित की बात की जाए तो शहर का सोनदरीय करण शहर के रास्तों का चौड़ी कारण और अवैध अतिक्रमण पर नगर निगम का ध्यान जायदा केंद्रित नजर आ रहा है लेकिन इन नदियों के प्रति नगर निगम का ध्यान सिर्फ त्योहारों में ही सिमट कर रह जाता है। बात करे मूर्ति विसर्जन की या छठ पर्व की तो इस दौरान नगर निगम भी अपनी सक्रियता दिखाते हुए गंदे पानी को स्वच्छ करने पर आमदा नजर आता है। या फिर मूर्ति विसर्जन के लिए नदियों के बाहर एक बड़ा सा कुंड खोदकर उसमें स्वच्छ पानी टैंकरों से नगर निगम कर्मी भरते नजर आते है।
बहरहाल कटनी महापौर श्रीमती प्रीति संजय सूरी जिन्हें कटनी की जनता ने अपना प्रथम नागरिक बनाकर नगर निगम पहुंचाया कि वह इन नदियों के प्रति अपनी जवाब देही दिखाते हुए इन्हें स्वच्छ बनाने में अपना ध्यान अवश्य केंद्रित करेगी लेकिन इन 1 वर्षों में उन्होंने भी इस पर रुचि नहीं दिखाई लेकिन वार्डों में बन रही रोड़ों का बजट अपने विकास कार्यों के प्रचार प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ी अमूमन जिले की जीवन दायनीय नदियों की अगर बात करे तो यह भीषण गर्मी में एक-एक बूंद जल के लिए तरसती हुई दिखाई देती हैं।
वही जिले के मुखिया कलेक्टर अवि प्रसाद जिनके वीडियो मानवीय पहल के सोसल मीडिया और समाचार पत्रों में सुर्खियां बने हुए हैं। उन्होंने भी शायद इस और अपना ध्यान केंद्रित नहीं किया जिससे इन नदियों का अस्तित्व बचाया जा सके हालांकि इस बात को लेकर पूर्व कमिश्नर एवं तत्कालीन कमिश्नर को माननीय न्यायालय ने भी इस बात को लेकर तलब किया है।की नदियों में गंदा वेस्टेज पानी क्यों गिराया जा रहा है।






