
कटनी।मध्य प्रदेश के कटनी जिले में अवैध उत्खनन और अवैध प्लाटिंग अब आम बात बन चुकी है। जिले की चारों तहसीलों में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिससे साफ है कि भू माफिया और खनन माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।
मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन द्वारा छोटी-मोटी कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन यह कार्रवाई ज्यादा दिन तक असरदार साबित नहीं होती। कुछ ही समय बाद वही माफिया फिर से सक्रिय हो जाते हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अभिजीत रंजन के समय में कुठला थाना क्षेत्र के कंहनवारा इलाके में अवैध उत्खनन का मामला सामने आया था। इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा अवैध उत्खनन पर कार्यवाही की जिन्हें कुछ समय के बाद लाइन किया गया वहीं अब खनन से जुड़ा यह मामला बिजरावगढ़ क्षेत्र के खिरवा और जूमवानी कला से सामने आया है, जहां माइनिंग विभाग ने एक पोकलेन मशीन जब्त कर कार्रवाई का दावा किया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह अवैध खनन आखिर कितने समय से चल रहा था? क्या संबंधित विभाग इतने समय तक अनजान बना रहा? जानकारी के अनुसार, बंद पड़ी खदान में वर्षों से अवैध उत्खनन जारी था, जिससे शासन को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। बावजूद इसके, सिर्फ एक मशीन जब्त कर विभाग अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है।
वहीं राजस्व विभाग की बात करें तो जिले में अवैध प्लाटिंग के मामले भी जिले में तेजी से बढ़ रहे हैं। भूमाफिया नियमों को दरकिनार कर प्लॉट काट रहे हैं और लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है, जिससे यह अवैध कारोबार और फल-फूल रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या कटनी में भू माफिया और खनन माफिया को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है? या फिर जल्द ही इन पर कोई सख्त और ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी?









