
कटनी ग्राम पंचायत मड़ई, कटनी में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर नवांकुर संस्था बारडोली व वेलफेयर सोसाइटी कटनी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन बड़े हर्ष और उत्साह के साथ किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की छवि पर माल्यार्पण और तिलकवंदन से हुई। संस्था के सदस्य एवं आदि कर्मयोगी गनपत लाल कोल ने बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलिहातू गाँव में हुआ।
उन्होंने जर्मन मिशन स्कूल में शिक्षा के दौरान आदिवासियों पर हो रहे अन्याय को गहराई से महसूस किया।
उन्होंने ‘उलगुलान’ आंदोलन चलाकर ब्रिटिश शासन, जमींदारी प्रथा और मिशनरियों के दमन के खिलाफ आदिवासियों को संगठित किया। एक धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेता के रूप में वे आदिवासी समाज में आत्मसम्मान और संघर्ष के प्रतीक बने।
9 जून 1900 को रांची जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
कार्यक्रम में स्वाति बर्मन और सरिता बर्मन द्वारा पारंपरिक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।
सरपंच ने बताया—बिरसा मुंडा का दिवस प्रेरणा का प्रतीक
ग्राम मड़ई की सरपंच कल्पना विजय सिंह ने कहा कि 15 नवंबर को भारत भर में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है, जो बिरसा मुंडा के संघर्ष और बलिदान को समर्पित है।
मानव सेवा का अद्भुत उदाहरण—बच्चों को स्वेटर वितरण
संस्था द्वारा आंगनवाड़ी के बच्चों को स्वेटर वितरित किए गए, जिसे मानव सेवा का सराहनीय कार्य माना गया। सभी उपस्थित लोगों ने संस्था के अध्यक्ष रामलखन चौधरी को निरंतर मानव सेवा के कार्यों के लिए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे
रूपा बर्मन, प्रेमवती, रूबी, सरिता, यूसुफ खान, देवनारायण दुबे, नीलम, सीता, राशि, स्वाति, गनपत लाल सहित ग्रामीणजन उपस्थित रहे।







