
कटनी। रेलवे विकास कार्यों के नाम पर की जा रही अनदेखी अब शहरवासियों और ग्रामीणों दोनों के लिए रोज़ की मुसीबत बन चुकी है। एनकेजे मार्ग और सिमरोल नदी पुल के आगे की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। बारिश की पहली ही बौछार ने एलएनटी कंपनी के कच्चे कार्यों की पोल खोल दी। नतीजा- एनकेजे का मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया।
भारी वाहनों द्वारा लाई गई चिकनी मिट्टी ने रास्तों को इतना फिसलन भरा बना दिया है कि राह चलते लोग एक-एक कर गिर रहे हैं। घायल हो रहे हैं, पर न रेलवे के अधिकारी जवाब दे रहे, न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिख रही है।
बंद नालों ने बढ़ाई आफ़त, स्कूल जाने के लिए 10 किमी का चक्कर
रेलवे द्वारा बनाए जा रहे ग्रेड सेपरेटर पुल की निर्माण प्रक्रिया के दौरान निकासी नालों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बंद कर दिया गया। नतीजतन, एक रात की बारिश में ही पानी ने मुख्य मार्ग को कमर तक डुबो दिया। हालात इतने खराब हैं कि स्कूली बच्चों को रोजाना 10 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय कर तिलक कॉलेज मार्ग से स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।
एक दर्जन गांवों की राह में कांटे
एनकेजे, रोशन नगर, नयागांव सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों के लिए यह मार्ग अब अभिशाप बन गया है। एलएनटी और इरकॉन जैसी कंपनियों के भारी वाहनों और मशीनों ने सड़कों की हालत खस्ताहाल कर दी है। रोजाना गिरते-घायल होते लोग अब चुप नहीं रहना चाहते।
आफताब अहमद जगजीवन वार्ड पार्षद पति
नाला पाटने से बढ़ी जलभराव की त्रासदी
नयागांव की ओर से आने वाले पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया गया है। नाले को पाट दिया गया, जिससे पहली बारिश में ही मुख्य मार्ग पर जल का जमाव कमर तक पहुंच गया। इससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और कई गांवों के लोग रोज़ की जिंदगी में भारी कठिनाई झेल रहे हैं।
निवासियों में आक्रोश, उग्र आंदोलन की चेतावनी
विगत दिनों मूंगा बाई और अन्य स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। अब लोगों का आक्रोश उबाल पर है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रास्ते की मरम्मत और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित कंपनियों की होगी।
कटनी की जनता अब सिर्फ सवाल नहीं पूछ रही, जवाब चाहती है।






