“हरियाणा के रसूखदार पर बड़ा आरोप बगैहा गांव की शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा कर मिट्टी खोदने का खेल”… “ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, प्रशासन से की गई शिकायत मौके पर पहुंचे तहसीलदार, जांच में जुटी टीम” .. पटवारी के पंचनामे ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या कार्रवाई होगी या फिर दब जाएगा मामला

कटनी जिले के बरही तहसील के ग्राम पंचायत छिंदहाई पिपरिया क्षेत्र ग्राम बगैहा हार में शासकीय जमीन पर खुलेआम अवैध उत्खनन का मामला अब प्रशासन की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसीलदार आदित्य द्विवेदी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन जांच के नाम पर जो हुआ, उसने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।

मौके पर हल्का पटवारी अनुज सिंह द्वारा तैयार पंचनामा प्रतिवेदन में जमीन की स्थिति ही स्पष्ट नहीं की गई—न यह बताया गया कि जमीन शासकीय है या लगानी। हैरानी की बात यह है कि राजस्व विभाग के पास पूरा रिकॉर्ड होने के बावजूद सच्चाई सामने लाने के बजाय अनावेदक के बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी गई।

जांच या लीपापोती?

पटवारी ने नामांतरण और डिमार्केशन का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और तब तक के लिए उत्खनन रोकने की औपचारिकता निभा दी। सवाल यह उठता है कि जब जमीन खरीदी गई बताई जा रही है, तो विक्रेता के नाम पर दर्ज जमीन का नाप कर सच्चाई सामने क्यों नहीं लाई गई क्या यह जानबूझकर सच्चाई दबाने की कोशिश है?

रसूखदार का खेल, सिस्टम फेल?

ग्रामीणों का साफ आरोप है कि उत्खनन करने वाला हरियाणा का व्यक्ति रसूखदार है, और इसी दबाव में राजस्व अमला उसे बचाने में जुटा है। नामांतरण और डिमार्केशन के नाम पर समय देकर मामले को लटकाना, सीधे-सीधे अनावेदक को राहत देना माना जा रहा है।

पुलिस की मौजूदगी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं!

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना से एक रात पहले बरही पुलिस मौके पर पहुंची थी, जहां टू-टेन मशीन और लगभग 3 हाइवा वाहन खुलेआम उत्खनन करते मिले। इसके बावजूद न तो मशीन जब्त हुई और न ही कोई सख्त कार्रवाई की गई। क्या पुलिस और राजस्व विभाग दोनों ने आंखें मूंद ली हैं?

ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च अधिकारियों से गुहार

लगातार हो रही इस लीपापोती से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शासकीय जमीन की लूट पर लगाम लग सके।

सीधा सवाल:

जब मौके पर मशीनें चल रही थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जब रिकॉर्ड मौजूद है, तो जमीन की स्थिति साफ क्यों नहीं की गई?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या रसूखदारों के सामने कानून बेबस हो चुका है?

अब नजर प्रशासन पर…

क्या इस बार भी मामला दबा दिया जाएगा, या फिर सच सामने आकर दोषियों पर गाज गिरेगी? गांव कि जनता जवाब चाहती है।

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