
कटनी। आज तेज बारिश के बीच भी श्रद्धा और आस्था का रंग फीका नहीं पड़ा। आंवला नवमी के पावन अवसर पर भक्तों ने भीगते हुए भी परंपरा निभाई और आंवला वृक्ष की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ लिया।
बतादे कि तेज बारिश के बावजूद महिलाएं सिर पर पूजा की टोकरी लेकर मंदिर और बगीचों की ओर जाती दिखीं। आंवला पेड़ के नीचे महिलाएं दीपक जलाकर, जल चढ़ाकर, पूजन करती नजर आईं। बारिश की बूंदों के साथ गूंजती रही—‘जय विष्णु भगवान’ की ध्वनि।
आज कार्तिक मास की शुक्ल नवमी को आंवला नवमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। परंपरा के अनुसार इस दिन आंवला वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का वास माना गया है, इसलिए महिलाएं व्रत रखकर आंवला के पेड़ की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
तेज बारिश के बीच भी महिलाओं ने भीगते हुए आरती उतारी, नारियल चढ़ाया और भगवान विष्णु की कथा सुनी कटनी,के शहरीय क्षेत्र बाबा घाट कटाए घाट बरही रीठी स्लीमनाबाद, विजयराघवगढ़, कैमोर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी पूजा-अर्चना का दौर सुबह से ही जारी रहा। कुछ जगहों पर मंदिरों में सामूहिक पूजा का आयोजन किया गया जहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बारिश हो या धूप, आंवला नवमी तो हम हर साल पूरे विधि-विधान से करते हैं। भगवान विष्णु से घर-परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।
आंवला नवमी के इस पावन पर्व ने यह साबित कर दिया कि आस्था बारिश में नहीं बहती—बल्कि भीगती है, निखरती है और श्रद्धा का रंग और गहरा कर जाती है।






