“ई-केवाईसी की जटिलता बनी गरीबों के लिए भूख का कारण, अनाज के लिए तरस रहे हितग्राही”

कटनी, मध्यप्रदेश।
राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों की ई-केवाईसी (eKYC) 15 मई तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए थे। इस विशेष अभियान में घर-घर जाकर ई-केवाईसी कराने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है।

ई-केवाईसी प्रक्रिया के अधूरी रहने से हजारों गरीब परिवारों को अनाज नहीं मिल पा रहा है। जिन परिवारों में पांच सदस्य हैं और तीन की ई-केवाईसी नहीं हो पाई, उन परिवारों को पूरी तरह से राशन से वंचित कर दिया गया है। नतीजतन, उनके समक्ष भूख का संकट खड़ा हो गया है।

इतना ही नहीं, जिन परिवारों में छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट नहीं आ रहे हैं, उनकी केवाईसी सरकार द्वारा सुझाए गए ऑथेंटिकेशन ऐप से करनी होती है। लेकिन तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण अधिकतर लोग इस ऐप का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और राशन से वंचित हो रहे हैं।

सरकार ने ई-केवाईसी को लेकर बदलाव तो किए, पर जमीनी स्तर पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है, यह जानने की कोशिश नहीं की गई। राशन ही गरीबों का सहारा था, और जब वही बंद हो गया तो उनके सामने दोहरी मार है—राशन की किल्लत और मजदूरी से भी दूरी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई हितग्राहियों को सस्ते अनाज के लिए अपनी दिहाड़ी तक छोड़नी पड़ रही है। वहीं जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस विकट परिस्थिति में मूकदर्शक बने हुए हैं।

गरीबों की ये दुर्दशा सरकार और प्रशासन के संवेदनहीन रवैए पर सवाल खड़े करती है।
राशन का सूखा अनाज भी तब तक उपयोगी नहीं जब तक पकाने के लिए ईंधन, तेल, मसाले और मेहनत से कमाया हुआ पैसा न हो। गरीब को जीने के लिए रोटी भी चाहिए और काम भी—पर ई-केवाईसी की यह तकनीकी दीवार उनके जीवन का निवाला छीन रही है। वही ई केवाईसी नहीं होने से पात्र परिवार परेशान होते हुए नजर आ रहे हैं।

बहरहाल बात करे तो जिले में राशन वितरण प्रणाली में जिनकी केवाईसी नहीं हुई है उनको पोर्टेबिलिटी के आधार पर कहीं से भी राशन देने की सुविधा प्रदान होनी चाहिए जिससे हितग्राही मौजूद राशन दुकान से राशन प्राप्त कर सके प्राप्त जानकारी के अनुसार फिलहाल ई केवाईसी के बाद पात्र हितग्राहियों को परेशान होना पड़ रहा है जो जिस वार्ड का हितग्राही है उसे वार्ड में मौजूद राशन दुकान से राशन दिया जाता था लेकिन उसे अन्य वार्ड से जोड़ दिया गया जिससे हितग्राहियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

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